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विश्व कैंसर दिवस: 90 प्रतिशत मुंह के कैंसर का कारक तंबाकू

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पटना। कैंसर का नाम सुनते ही अच्छे-अच्छों के पसीने छूट सकते हैं। तमाम प्रयासों के बावजूद कैंसर के मरीजों की संख्या में कोई ख़ास कमी नहीं आ रही है। कैंसर कई तरह के होते हैं लेकिन पिछले कुछ सालों के दौरान देश में ओरल कैंसर ने महामारी का रूप धारण कर लिया जिसका सर्वाधिक बड़ा कारक तंबाकू उत्पादों को माना जाता है। ओरल कैंसर के जनक तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर पूर्णतया प्रतिबंध नहीं लगाया गया तो एक अनुमान के मुताबिक अकेले भारत में ही अगले तीन साल में करीब 09 लाख जिंदगियां काल के ग्रास में समाहित हो जाएंगी।

इंडियन कांउसिल मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के अनुसार, साल 2020 तक 17.3 लाख लोगों को जानलेवा बीमारी कैंसर जकड़ लेगी जिससे 8.8 लाख लोग कैंसर की वजह से अपनी जान गंवा चुके होंगे। इससे न केवल लाखों परिवार प्रभावित होंगे बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। विश्व में एड्स, मलेरिया और टीबी से ज्यादा कैंसर पीड़ितों की मौत हो जाती है। वहीं मौत के दस प्रमुख कारणों में कैंसर प्रमुख है। तंबाकू पर पूर्ण: प्रतिबंध हो तभी कैंसर को रोका जा सकता है।

वायॅस ऑफ टोबेको विक्टिम्स (वीओटीवी) के स्टेट पैट्रन एवं जाने माने कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ0 वी.पी. सिंह का कहना है कि तंबाकू के इस्तेमाल को कम करने के लिए राज्य सरकार को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का सख्ती से पालना करवाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब हमें पता है कि 90 प्रतिशत मुंह के कैंसर का कारक तंबाकू उत्पाद है, इस स्थिति में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का सुनिश्चित कराने में क्या दिक्कत है। इस आदेश का निश्चित पालन करवाना चाहिए ताकि हर साल तंबाकू से होने वाली लाखों मौतों से लोगों को बचाया जा सके।

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श्री सिंह ने कहा कि स्वस्थ जीवन शैली को अपनाने से भी कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है। बेहतर जीवनशैली, साफ-सफाई, संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और हेल्थ चेकअप के जरिये कैंसर से बचा जा सकता है। संबध हेल्थ फांउडेशन (एसएचएफ) के ट्रस्टी संजय सेठ ने कहा कि ग्लोबल एडल्ट टोबेको सर्वे (गेटस्) के अनुसार भारत में 26.7 करोड़ लोग तंबाकू का उपभोग करते है जबकि 5500 बच्चे प्रतिदिन तंबाकू उत्पादों का सेवन शुरु करतें है। इनमें से अधिकतर की मौत को तंबाकू पर प्रतिबंध लगाकर बचाया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि विश्व कैंसर दिवस प्रत्येक वर्ष 4 फ़रवरी को मनाया जाता है। आधुनिक विश्व में कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिससे सबसे ज़्यादा लोगों की मृत्यु होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हर साल 04 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस की तरह मनाने का निर्णय लिया ताकि लोगों को इस भयानक बीमारी कैंसर से होने वाले नुकसान के बारे में बताया जा सकें और लोगों को अधिक से अधिक जागरूक किया जा सकें।

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