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मनचलों का भी हो एनकाउंटर

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पहले अपराधियों की धींगामस्ती से जाना जाने वाला शामली अब मनचलों की करतूतों के चलते बदनाम होता नजर आ रहा है। समाज का कलंक कहे जाने वाले इन असामाजिक तत्वों के हौंसले इतने बुलंद हो गए हैं कि उन्हें कानून का भी डर नही रह गया है, हो भी क्यों ना इन्हें पता होता है कि यदि पुलिस ने इन्हें पकड लिया, तो परिवार के लोग जातीय नेताओं की बदौलत इन्हें छुडवा लेंगे। इसी के चलते जिले में छेडछाड से तंग छात्राओं द्वारा आत्मदाह करने, फांसी लगाने की घटनाएं भी देने को मिली है। अब तो हद हो गई हैे। कांधला के गढीश्याम में हुई छात्रा की हत्या की वारदात ने तो पूरे समाज का सिर शर्म से झुका दिया है, क्योंकि यह सिर्फ सोनी की कहानी नही है, सभी के परिवारों को इस तरह के माहौल में रहना पड रहा है। धिक्कार है ऐसे समाज पर जहां यदि कोई मीडियाकर्मी छात्राओं के झुके हुए सिरों को उठाने का प्रयास करता है, तो समाज के अनपढ़, जाहिल और गंवार लोग भीड़ की शक्ल में हमला बोल देते हैं। फिलहाल जिले के हालातों को ध्यान में रखते हुए पुलिस को भी सख्ती बरतने की जरूरत है। सख्ती भी ऐसी, कि जो मनचलों के लिए सबक बनकर उन्हें सुधारने का काम करें।
-नदीम चौहान, एडिटर इन चीफ, लाइव24.कॉ

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